सीपी जोशी नए विधानसभा अध्यक्ष बने, बधाई भाषण के दौरान बेनिवाल और राठौड़ में बहस

जयपुर. कांग्रेस विधायक सीपी जोशी बुधवार को राजस्थान विधानसभा के नए अध्यक्ष चुन लिए गए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके नाम का प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया प्रस्ताव का अनुमोदन किया। इसके बाद उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, राजेंद्र राठौड़, महादेव सिंह खंडेला, बलवान पूनियां, कांति प्रसाद एवं राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने भी एक-एक कर प्रस्ताव रखे। इसका अनुमोदन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, महेश जोशी, आलोक बेनीवाल, बाबू लाल नागर, गिरधारी लाल और हनुमान बेनीवाल ने किया। अध्यक्ष के चुनाव के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सीपी जोशी के विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने पर मुख्यमंत्री गहलोत ने सदन की ओर से उन्हें बधाई दी। गहलोत ने कहा कि सदन से आपका रिश्ता 38 साल पुराना है। सभी पार्टियों ने आपके नाम का प्रस्ताव किया है। इस कारण विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सदन को चलाने में आपका अनुभव काम आएगा।

बधाई भाषण के दौरान हंगामा

जोशी के अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनको बधाई दी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने भी उन्हें बधाई दी। विधायक हनुमान बेनिवाल ने अपने बधाई संबोधन में पिछली सरकार पर निशाना साधा। इस पर राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई। बात बढ़ती देख मुख्यमंत्री गहलोन ने हस्तक्षेप किया और बोले कि आज आरोप-प्रत्यारोपों का मौका नहीं है। सभी को सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और इस बारे में कभी अपनी बात कहनी हो तो किसी और अवसर पर कहें।

सीपी जोशी: 4 बार विधायक रहे हैं

सीपी जोशी नाथद्वारा से 4 बार विधायक बन चुके हैं। इसके साथ ही मनमोहन सरकार में केंद्र मंत्री भी रह चुके हैं। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रहे।
2008 विधानसभा चुनाव में जोशी सिर्फ 1 वोट से हार गए थे। बाद में 2009 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर मनमोहन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। इस दौरान वे पंचायतीराज, ग्रामीण विकास, भूतल परिवहन एवं राजमार्ग और रेल मंत्रालय के मंत्री रहे।
यूपीए सरकार जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बंगाल, बिहार एवं असम का प्रभारी बनाया गया। एक समय ऐसा आया जब कांग्रेस ने सभी पूर्वोत्तर राज्यों का प्रभार जोशी को दे दिया। बिहार में महा गठबंधन जीता। लेकिन, बाद में लगातार पार्टी पूर्वोत्तर राज्यों में हारती गई।