सूरजपुर : धान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत – डॉ. रमन सिंह : ’रमन के गोठ’ 26 वी कड़ी की किया गया सामूहिक श्रवण

मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ‘ कार्यक्रम की छब्बीसवीं कड़ी में कहा है कि छत्तीसगढ़ में धान के साथ ही तेंदूपत्ता और गन्ना खरीदी पर भी बोनस दिया जाता है। उन्होंने कहा है कि धान सदियों से किसानों की आय का मुख्य जरिया रहने के साथ ही यह हमारी सांस्कृतिक बिरासत से जुड़ा है। किसान धूप, गर्मी, बारिष, ठण्ड में मेहनत एवं परिश्रम कर पसीने के एक-एक बुंद से धान का एक-एक दाना उपजाता है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को धान बिक्री करने के लिए धान खरीदी केन्द्र में उचित व्यवस्था की गई हैं। ओढ़गी विकासखण्ड के ग्राम मोहरसोप के किसान श्री धरमपाल ने राज्य सरकार द्वारा किसानों को पिछले वर्ष बेची गई धान पर दिये जा रहे बोनस की सराहना की है तथा कहा है कि किसानों को बोनस मिल जाने से उन्हें आर्थिक संबल मिला हैं। इसी तरह ग्राम चापदा की किसान श्रीमती लक्ष्मीबाई और ग्राम लटोरी के किसान श्री श्याम राजवाडें ने धान बोनस वितरण की प्रषंसा करते हुए कहा है कि इससे उन्हें जरूरी कार्य करने में सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने कहा है कि वर्ष 2003-04 से धान खरीदी उत्तरोत्त वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 तक 6 करोड़ 91 लाख 59 हजार मिट्रिक टन धान की खरीदी करते हुए अब तक किसानों को लगभग 75 हजार करोड़ रूपये का भुगतान धान की कीमत के तौर पर किया गया है।  डॉ.सिंह ने कहा कि खरीफ वर्ष 2016-17 में समर्थन मूल्य पर लगभग 69 लाख मीट्रिक टन धान किसानों से खरीदा गया, जिस पर 300 रूपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लेकर ’बोनस तिहार’ का आयोजन कर 21 सौ करोड़ रूपये का बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगामी वर्ष 2017-18 के लिए भी बोनस वर्ष 2018-19 में दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ.सिंह ने कहा कि किसानों की बेहतरी के लिए धान के समर्थन मूल्य में 80 रूपये बढ़ने के बाद और 300 रूपये बोनस मिलने के बाद किसानों की धान की कीमत 1890 रूपये यानी लगभग 1900 रूपये प्रति क्विंटल किसानों को मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बार प्रदेष के 96 तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है जिससे राहत देने के उपाय भी शुरू किया है। इन परिस्थितयों में 21 सौ करोड़ रूपये के बोनस जब हमारे किसान भाईयों के पास जायेगा तो न सिर्फ इस साल की दिवाली खुषी से मना पायेंगे बल्कि सूखे से लड़ने और आगे की कार्ययोजना बनाने में अपने आप को सक्षम पायेंगे। किसानों के घर पैसा आने पर घर में मांगलिक कार्य होंगे, किसान अपने बेटे-बेटियांे की शादी-ब्याह कर सकेंगे साथ ही जरूरी सामान की खरीदी तथा आावष्यक निर्माण कर सकेंगे। इस तरह किसान और गांव का विकास होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आषीर्वाद से ही राज्य सरकार को यह निर्णय लेने की शक्ति मिली।
डॉ.सिंह ने कहा कि वनांचल एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो मेें लघु वनोपज आय का प्रमुख जरिया होता है। वर्ष 2003-04 में तेंदूपत्ता संग्रहण की मजदूरी दर मात्र 350 रूपये मानक बोरा थी जिसे बढ़ाकर 1800 सौ रूपये मानक बोरा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2017 तक यदि 1 हजार 904 करोड़ रूपये तेंदूपत्ता के संग्रहण में पारिश्रमिक मिला तो उसी अवधि में 2004 से 2015 तक 1 हजार 223 करोड़ का बोनस भी दिया गया अर्थात् जितनी राषि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए दिया जाता है करीब-करीब उतनीं ही राषि तेंदूपत्ता के बोनस के रूप में मिलता है। इसके साथ ही साथ उन्हें बेहतर व्यवस्था के लिए तेंदूपत्ता के संग्राहकों के लिए ऐसी योजनाएं बनाई गई हैं जो उनकी सोच में परिर्वतन लाने के लिए है, उनके जीवन में एक बेहतरी के लिए है। 14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरणपादुका देने से यह असर हुआ है कि पिछले 8-10 सालों में पैर कटने की एम्पूटेषन की जो घटनाएं होती थी अथवा पैर काटने की जरूरत पड़ती थी उसमें कमी आई है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक का चरणपादुका का उपयोग करना भी शूरू कर दिया है एवं उनके विचार मे भी परिर्वतन आयें हैै। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, आई.टी.आई. आदि संस्थानों में पढ़ना है, तो उनको छात्रवृत्ति देने के साथ-साथ फीस की व्यवस्था की जाती है। उनकी बेटियों के लिए कन्यादान योजना, तेंदूपत्ता संग्रहकों के लिए निःषुल्क शादी की योजना है। डॉ.सिंह ने कहा कि प्रदेष में बड़ी संख्या में वनवासी, साल बीज, हर्रा, कुषूमी लाख, रंगीनी लाख, चिरौंजी, ईमली, महुआ गुठली के संग्रह से अपनी आजीविका चलाते हैं। इन परिवारों को बेहतर आय दिलाने के लिए इस पर लघुवनोपजों की खरीदी का न्यूनत्तम समर्थन मूल्य तय किया गया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि विगत एक दषक में उद्यानिकी फसलों का रकबा 2 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8 लाख 25 हजार हेक्टेयर हो गया है। करीब 4 गुन्ना उद्यानिकी फसल में वृद्धि के साथ उद्यानिकी फसलों का उत्पादन 17 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 91 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए ’कृषक उत्पादक संगठन बनाये जा रहे हैं जिसमें 40 हजार से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। उन्हें कहा कि इसी तरह उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के साथ-साथ उनके प्रबंधन तथा विपणन की व्यवस्था भी कर रहें हैं। डॉ.सिंह ने कहा कि क्रॉप, डायवर्सीफिकेषन  किसनों के लिए सिर्फ नारा नहीं है बल्कि यहां के किसान इसे एडाप्ट करते जा रहें हैं जिससे उद्यानिकी में 8 से 10 गुन्ना वृद्धि अपने आप में चमत्कृत करने वाली है।उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय 1 हजार टेक्ट्रर हर साल खरीदे जाते थे अब 2009-10 के बाद 1 हजार से बढ़कर औसतन 10 हजार टेक्ट्रर प्रतिवर्ष किसान भाई खरी रहें है। इससे हमारे प्रदेष में किसानों के पास  डेढ़ लाख से अधिक टेक्ट्रर हो गये हैं जो हमारी बढ़ती हुई क्षमता और कृषि विकास की बढ़ती गति का प्रतीक है। सन 2011 तक हारवेस्टरों की नगण्य थी, जबकि अब 1400 हारवेस्टर पंजीकृत हो गयें है। उन्हेांने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिफ 72 हजार सिंचाई पंप थे और 2017 के आते-आते लगभग साढ़े चार लाख किसान भाईयों के पास सिंचाई पंप हो गये हैं। जहां बिजली की व्यवस्था नहीं है वहां भी किसान सिंचाई कर सकें इस के लिए सौर सुजला योजना के तहत 51 हजार से अधिक सोलर पंप दे रहें है।
डॉ.सिंह ने कहा कि इस साल बोनस तिहार से गांव-गांव में दिवाली के पहले से ही दिवाली शुरू हो गई है। इस उत्साह और जोष का उपयोग हमारे किसान भाई भावी योजना बनाने के लिए  स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए भी करें, दिवाली पर चीनी पटाखे, चीनी बिजली के सामान आदि का उपयोग न करें। गांव में बने दीये। तथा मिट्टी के सामानों का उपयोग करें। अपने चारों ओंर साफ-सफाई रखें तथा किसी भी तरह का प्रदूषण न फैलने दें।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मासिक रेडियोवार्ता रमन के गोठ के 26 वीं कड़ी का सामूहिक श्रवण आज जिला मुख्यालय के साथ ही जनपद पंचायत मुख्यालय और ग्राम पंचायतों में भी रमन के गोठ का सामूहिक श्रवण किया गया।