हाईकोर्ट में मास्टर प्लान पर सरकार ने नहीं दिया जवाब, चार दिनों की मोहलत

बिलासपुर।शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग करते हुए लगाई गई जनहित याचिका पर सोमवार को राज्य शासन की तरफ से जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हाईकोर्ट ने शुक्रवार यानी 3 नवंबर तक जवाब प्रस्तुत नहीं होने की स्थिति में आवास एवं पर्यावरण विभाग के ऑफिसर इन चार्ज को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
– बिलासपुर के मास्टर प्लान को लेकर बिल्डर्स की संस्था क्रेडाई, डॉक्टरों की संस्था आईएमए, आर्किटेक्ट की संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, बिलासपुर प्रेस क्लब और व्यापारियों की संस्था बिलासपुर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता सुमेश बजाज के जरिए जनहित याचिका प्रस्तुत की है।
– याचिका में बताया गया है कि बिलासपुर के मास्टर प्लान की अवधि 2011 पूरी हो चुकी है। इससे पहले ही अगला मास्टर प्लान 2031 तक का बनाया जाना था, इसकी प्रक्रिया 2014 में शुरू हुई। इसमें 93 गांवों को शामिल किया गया है।
– 2031 तक आबादी का अनुमान 15 लाख का मान कर डेवलपमेंट पर खर्च का आंकलन 2540 करोड़ रुपए निर्धारित किया। इस मास्टर प्लान को 2015-16 से लागू कर देना था, लेकिन अब भी मास्टर प्लान अधर में है। सरकार ने 9 नवंबर 2016 में मास्टर प्लान को अनुमोदित कर 9 दिसंबर 2016 को गजट में प्रकाशित किया था।
– वहीं 36 प्रकरणों की मई 2017 में दोबारा सुनवाई भी पूरी कर ली गई, इसके बाद भी मास्टर प्लान को लागू नहीं किया जा रहा है। 9 अक्टूबर को प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन समेत अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर 30 अक्टूबर तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
– सोमवार को जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की बेंच में सुनवाई के दौरान जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हाईकोर्ट ने शुक्रवार तक जवाब प्रस्तुत नहीं होने की स्थिति में आवास एवं पर्यावरण विभाग के ओआईसी यानी ऑफिसर इन चार्ज को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
– छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में मास्टर प्लान को लेकर प्रावधान तय हैं। धारा 19 में चार विकल्प तय किए गए हैं। धारा 19 (1) के तहत विभाग के संचालक द्वारा प्रस्तुत मास्टर प्लान को सरकार जस का तस अनुमोदित कर देगी।
– धारा 19 (2) के तहत अनुमोदित करने के बाद कुछ बदलावों की अनुशंसा करते हुए संचालक को वापस भेजेगी। 19(3) के तहत अनुमोदित किए बगैर बदलावों की अनुशंसा करते हुए संचालक को वापस भेजेगी। वहीं, धारा 19 (4) के तहत पूरे प्रस्ताव को वापस भेजेगी और नए सिरे से मास्टर प्लान बनाने के लिए कहेगी।
– बिलासपुर के मास्टर प्लान के मामले में धारा 19 (2) के तहत मास्टर प्लान को अनुमोदित करने के साथ गजट में दिसंबर 2016 में प्रकाशित किया जा चुका है, वहीं, कुछ बदलावों की अनुशंसा की गई थी।
– अनुशंसा के मुताबिक मई 2017 में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब फॉर्म 2 भर कर राजनांदगांव स्थित सरकारी प्रेस भेज कर गजट और अखबारों में प्रकाशित कराना है, लेकिन सुनवाई पूरी होने के पांच माह बाद भी यह प्रक्रिया अटका कर रखी गई है।