हीरा-सोने और बेशकीमती खदानों की ऐसी सुरक्षा, टूट गया तार घेरा चोर गेट ले गए और छोड़ गए पिलर

रायपुर। पायलीखंड हीरा खदान में मध्यप्रदेश के जमाने में सुरक्षा में सेना लगाई गई। कंटीले तार लगे, बड़ा गेट बना। राज्य अलग हुआ तो गेट और तार चोर ले गए। लाटापारा और सेंधमुड़ा में खदान के नाम पर खुला खेत है। लोग दिन में भी बेरोकटोक एलेक्जेंड्राइट तलाशते नजर आ जाएंगे। सोनाखान में तो सुरक्षा के प्रयास तक नहीं हुए। ग्रामीण बरसों पहले सोने के लिए मिट्टी-रेत जिस बेफिक्री से छानते थे, अब भी वही कर रहे हैं।
गरियाबंद से लगे पायलीखंड हीरा खदान में सुरक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां कभी भी कोई भी हीरों के लिए खुदाई कर सकता है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय वहां सेना के जवानों को सुरक्षा के लिए लगाया गया था। लेकिन छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद जवानों का घेरा हटा लिया गया। तब से खदान की सुरक्षा खत्म हो गई। खदान के चारों ओर कंटीले तार लगाए गए थे, प्रवेश द्वार पर बड़ा गेट लगाया गया था। अब गेट के नाम पर वहां केवल सीमेंट के पिलर ही बचे हैं। कंटीले तार हर जगह से टूट चुके हैं। खदान में जगह-जगह गड्ढे दिखाई देते हैं जिससे पता चलता है कि हीरों के लिए खदान के हर हिस्से में बैखौफ तरीके से खुदाई की जा रही है।
गांव के लोगों ने बताया कि खदान की सुरक्षा नहीं होने की वजह से झारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और बिहार के कई ठेकेदार मिट्टी की खुदाई के लिए 300 से 400 रुपए प्रति दिन रोजी के हिसाब मजदूरों को लेकर आते हैं। इन लोगों को रोकने वाला कोई नहीं होता है। इनमें गांव के भी कई लोग शामिल होते हैं। इसलिए कोई विरोध भी नहीं करता है। खदानों में ट्रक लगाए जाते हैं जो जंगल के रास्ते से उड़ीसा बॉर्डर में भेजे जाते हैं। ट्रकों में मिट्टी भरने का काम भी दोपहर और रात दोनों समय बेखौफ तरीके से होता है। गांव के कई लोग ऐसे हैं जो खुद ही मिट्टी की खुदाई करते हैं उन्हें वहां से कुछ मिलता है तो वे उसका सौदा कारोबारियों से मौके पर ही कर लेते हैं।
इंद्रावती पर 17 साल में नहीं बना पुल
पायलीखंड हीरा खदान जाने के लिए जांगड़ा गांव होकर जाना पड़ता है। जांगड़ा गांव से लगकर इंद्रावती नदी बहती है। नदी के एक किनारे में पायलीखंड और दूसरे किनारे में जांगड़ा गांव है। यहां के लोग 17 साल से नदी में पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पूल नहीं बना है। बारिश में नदी उफान में होती है इसलिए पायलीखंड का संपर्क सभी से टूट जाता है। जांगड़ा गांव से करीब 6 किमी की दूर पर जुगाड़ थाना है। यहां सीआईएसएफ का कैंप भी है। खदान और थाने की दूरी ज्यादा होने और बीच में नदी के कारण जवान नहीं जाते। कभी कोई शिकायत भी मिलती है तो खदान में पहुंचते तक तस्कर भाग जाते हैं।