15 साल की नेहा रोज 10 घंटे करती हैं प्रैक्टिस रात आठ बजे से स्टेडियम में ही पढ़ती हैं ट्यूशन

रायपुर।छत्तीसगढ़ की नेहा कार्वा आज न सिर्फ अंडर-16 भारतीय बास्केटबॉल टीम की अहम सदस्य हैं, बल्कि महज 15 साल की उम्र में साथियों के लिए मिसाल भी बन गई हैं। इसकी वजह उनका रोज का संघर्ष है। वे रोज 10 घंटे ट्रेनिंग करती हैं। इसके बाद रात साढ़े आठ बजे से बास्केटबॉल कोर्ट या स्टेडियम में ही ट्यूशन भी पढ़ती हैं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित ना हो।फाइनेशियल कंडिशन नहीं हैं अच्छी…
– जब नेहा से पूछा गया कि आखिर इतनी मेहनत की प्रेरणा कहां से मिली? इसके जवाब में नेहा कहती हैं, ‘मेरी पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं है। मां सुरजो दूसरों के घरों में साफ-सफाई करती हैं। 2012 में जब वे बास्केटबॉल कोच सरजीत चक्रवर्ती के घर पर काम कर रही थीं, तब मैं वहां रखी बास्केटबॉल गेंद से खेलने लगीं। कोच को लगा कि मैं बेहतर खिलाड़ी बन सकती हूं।
– उन्होंने मेरे परिवार से बात की और भिलाई की एकेडमी में डे-बोर्डिंग स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन दिला दिया। तब से मेरा एक ही जुनून है। सिर्फ खेल।’ नेहा ने बताया कि एकेडमी में तो सुबह-शाम का वक्त तय है। पर वे दोपहर में भी एकेडमी आकर कम से कम दो घंटे प्रैक्टिस करती हैं। नेहा अंडर-16 टीम में प्वाइंट गार्ड हैं। भारतीय टीम ने दो दिन पहले ही फीबा अंडर-16 एशियन चैंपियनशिप का बी डिवीजन टूर्नामेंट जीता है। अब यह टीम ए डिवीजन में खेलेगी।
पांच साल पहले किसी बड़े खिलाड़ी को जानती भी नहीं थी एलिजाबेथ, अब नेशनल टीम में
– नेहा कार्वा की तरह एलिजाबेथ एक्का भी बड़े संघर्ष के बाद टीम में पहुंची हैं। वे रायपुर से 325 किमी दूर पत्थलगांव से हैं। उनके गांव मंे कोई भी ऐसा नहीं है, जिसने कभी खेल को करिअर बनाने के बारे में सोचा हो। 15 साल की एलिजाबेथ कहती हैं कि उन्होंने केवल बड़े खिलाड़ियों का नाम सुना था।
– एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम में शामिल बतौर शूटिंग गार्ड शामिल एक्का ने 27 प्वाइंट बनाए। कई मौकों पर उन्होंने टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एलिजाबेथ कहती हैं, ‘मैं गांव के स्कूल मंे खेलती थी।
– एक बार छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल टीम के मुख्य कोच राजेश पटेल ने मुझे खेलते हुए देखा। उन्होंने मेरे माता-पिता से बात की और मुझे भिलाई के एकेडमी में ले आए। तब से मैं यहीं हूं।’ एलिजाबेथ का खर्च भिलाई इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन उठाता है