17 साल पहले नदी से गांव तक पानी की पाइप लाइन बिछाई, अब सूखे को मात दे रहे।

बिलासपुर।17 साल पहले एक परिवार ने लीलागर नदी से गांव तक पाइप लाइन बिछाई। नदी से पानी लिफ्ट कर खेत गांवों में निस्तारी के लिए लाया। पथरीली जमीन वाले गांव में पीने निस्तारी के लिए पानी की समस्या दूर हुई तो ग्रामीणों ने दो समितियां बनाकर शासन से लोन लिया और 30 लाख की लागत से यहीं काम किया। नतीजा इस साल जब आसपास के सैकड़ों गांवों में सूखा है, इस गांव के 90 फीसदी खेतों में धान की फसल लहलहा रही है। यह गांव सूखे को मात दे रहा है।

1970 में जांजगीर-चांपा जिले के डभरा इलाके के गांव साल्हे से मस्तूरी ब्लॉक के मल्हार के पास ग्राम भरारी आकर बसे पटेल परिवार को जल्द ही समझ में गया कि उनका यहां आना ठीक नहीं। गांव में सिंचाई के लिए तो दूर पीने के पानी की भी किल्लत थी। ग्रामीण बैलगाड़ी में ड्रमों में पानी भरकर लाते तब निस्तारी कर पाते थे।
– पटेल परिवार ने ट्यूबवेल कराया, लेकिन 600 फीट पर भी पानी नहीं मिला। 2007 में गिरधारी पटेल कसडोल के पास देवरूम गांव रिश्तेदार के यहां गए। वहां जोक नदी पर पानी लिफ्ट किए जाने की योजना देखी। आकर उन्होंने अपने भाइयों भोजकुमार, मिथलेश्वर और राधेश्याम से चर्चा की।
– उन्होंने जीजा मोहनलाल पटेल और निरंजन पटेल से भी सहयोग लिया। इन सभी ने मिलकर नदी से लेकर गांव तक करीब एक किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछाई। दो महीने की मेहनत ढाई लाख रुपए की लागत से वे नदी का पानी लाने में सफल हो गए। पर यह नाकाफी था।
– 2003 में ग्रामीणों ने महिलाओं के दो समूह बनाए। इन समूहों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से स्वर्ण जयंती ग्राम स्व रोजगार योजना के तहत 30 लाख रुपए लोन लिया। फिर उद्वहन सिंचाई योजना के तहत पाइप लाइन गांवों के दूर के खेतों तक बिछाई गई। नतीजा अब नदी में पानी होने पर इस गांव में पानी की किल्लत नहीं होती। गांव में धान की फसल अब लहलहा रही है।
गांव की जमीन पथरीली, 50 बोर फेल हो चुके हैं
गांव में पानी की समस्या हल करने वाले गिरधारी पटेल अब बुजुर्ग हो गए हैं। वे बताते है कि गांव की जमीन पथरीली है। सबसे बड़ी समस्या ग्राउंड वाटर की है। 50 बोर फेल हो चुके हैं। नदी क्षेत्र को छोड़ दें तो पूरे गांव में 600-700 फीट पर भी पानी नहीं है। शासन भी यहां अब कहीं जाकर ओवरहेड टैंक बना सकी।