200 करोड़ की पैनल्टी में उलझे अडानी के लिए संकटमोचक बनी सरकार

नई दिल्ली: देश के शीर्ष उद्योग समूहों में शामिल अडानी पोट्रस एंड एसईजेड पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। दरअसल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान अडानी समूह पर इस तरह का आरोप लगाया गया था। इस जुर्माने को वर्तमान केंद्र सरकार ने वापस लेने का निर्णय भी लिया। एक प्रमुख अंग्रेजी बिजनेस समाचार पत्र में रिपोर्ट प्रकाशित की गई। जिसमें यह कहा गया कि पर्यावरण से जुड़े नियमों के उल्लंघन हेतु एक बड़ा जुर्माना आरोपित किया गया था।

मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के गुजार मुद्रा स्थित वाटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को वर्ष 2009 में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से क्लीयरेंस दिया था। इस क्लीयरेंस को आगे बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं कंपनी द्वारा जो नोटिस जारी किए गए हैं उन नोटिस पर किसी तरह की कार्रवाई न करने की बात कही गई है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कार्यकाल में एक जांच समिति का गठन वर्ष 2012 में किया गया।

दरअसल सुनीता नारायण की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान होता था। इतना ही नहीं इस उद्योग पर अवैध तरह से जमीन लेने की बातों का खुलासा भी किया गया है।

दरअसल समिति द्वारा परियोजना के उत्तरी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और क्षतिपूर्ति हेतु परियोजना लागत का करीब 1 प्रतिशत या फिर 200 करोड़ रूपए दोनों में से जो अधिक हो उसे वसूलने की सिफारिश की गई थी। ऐसे में समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मंत्रालय द्वारा अडानी पोर्ट एंड सेज को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।

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