25 लोग पिछले सात साल से थे बंधक, हरेक को मिले 3 लाख रुपए

गुना/ बमोरी.राजस्थान के बारां जिले के बादीपुरा गांव में बंधुआ बनाकर रखे बमोरी के आठ परिवारों के 25 लोगों को मुक्त कराया गया है। दिल्ली की संस्था नेशनल कैंपेन कमेटी फोर इरेडिकेशन ऑफ बॉडेड लेबर एवं ह्‌यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क के सदस्यों व स्थानीय प्रशासन की मदद से यह कार्रवाई की।
ये लोग कामगार के रूप में पिछले सात साल से बंधक थे। खेत मालिक इन्हें एक माह में 25 किलो अनाज देता था और बदले में 16 घंटे तक काम कराता था। उक्त लोगों को बादीपुर निवासी विजेंद्र सिंह, गुरचरण एवं बंटिया सरदार के फार्म हाउस एवं खेतों से मुक्त कराया गया है। मुक्त कराए गए सहरिया आदिवासी बमोरी के मामला, पारोंदा और बर्धा गांव में रहने वाले हैं। यह राजस्थान की सीमा से लगे हुए गांव हैं। संस्था के संयोजक निर्मल गोराना ने बताया कि बारां प्रशासन ने सभी को मुक्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिए थे और सम्मान के साथ उन्हें बस से गुना भेजा गया।
आदिवासी परिवार अपने गांव नहीं लौटना चाहते
आदिवासी परिवारों ने अपने गांव जाने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि उनके गांव राजस्थान सीमा से लगे हुए हैं। जिन लोगों ने उन्हें बंधक बनाकर रखा था वे कभी भी उनको नुकसान पहुंचा सकते हैं या फिर जबरन वापस ले जा सकते हैं।
हरेक को 3 लाख रुपए मिलें
गोराना ने कहा कि बारां प्रशासन ने मुक्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है, अब गुना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इन्हें 20 हजार की सहायता दे। बाद में हर सदस्य को 3-3 लाख रुपए और उनके पुनर्वास की कार्रवाई करें। उल्लेखनीय है कि गुना के 450 से ज्यादा मजदूर इसके लिए हाईकोर्ट में इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं।