27 साल बाद गुरु-चित्रा नक्षत्र के संयोग में होगा महालक्ष्मी पूजन

27 साल बाद धन की देवी महालक्ष्‍मी के पूजन का पर्व दीपावली 19 अक्टूबर गुरुवार को गुरु-चित्रा नक्षत्र का संयोग में मनाई जाएगी। कार्तिक मास की अमावस्या पर पूजन के लिए इस बार प्रदोषकाल शाम को 2.05 मिनिट रहेगा। इसके साथ रात 8 बजे से चार ग्रह सूर्य, चंद्र, बुध और गुरु चारो एक साथ तुला राशि में होंगे।

ज्योर्तिविद् श्यामजी अग्रवाल के अनुसार इससे पहले यह संयोग 1990 में बना था जब एक ही दिन चित्रा नक्षत्र में गुरुवार को दीपावाली आई थी। इसके बाद यह संयोग अब चार साल बाद 2021 में आएगा। पं. ओम वशिष्ठ के अनुसार सुबह 7.25 तक हस्त नक्षत्र रहेगा। इसके बाद गुरु-चित्रा नक्षत्र का संयोग दिवस पर्यंत रहेगा। यह संयोग इस दिन को खास बना रहा है। इसके चलते लक्षमी, कुबेर और भगवान गणेश का पूजन समृद्धि प्रदान करेगा।

इस दिन सूर्य और बुध की युति बनने से बुधादित्य योग भी बन रहा है। इसका लाभ व्यापारिक वर्ग के साथ आम जनमानस को भी मिलेगा। माता लक्षमी के पूजन के लिए स्थिर लग्न का विशेष महत्व है। प्रदोषकाल में स्थिर लग्न में माता का पूजन करना अच्छा माना जाता है।

दीपोत्सव पर महालक्ष्‍मी कुबेर पूजन और दीपदान के मुहूर्त

शुभ : सुबह 6 से 7.52, शाम 4.26 से 5.52 और रात 3. से 4.52 बजे तक।

लाभ : दोपहर 12,10 से 1.35 से रात 12.09 से 1.43 बजे तक।

अमृत : शाम 7.27 से रात 9.00 बजे तक।

चर : सुबह 10.43 से दोपहर 12.09 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11.45 से 12.33 बजे तक।

महानिशीधकाल : रात 11.45 से 12.33 बजे तक।

प्रदोषकाल : शाम 5.45 से 7.57 बजे तक।