2G घोटाला: हर राजनैतिक दल रख रहा अपनी अपनी राय….

बहुचर्चित घोटाले का फैसला जैसे ही आया इस पर भी मानो सियासी धमसान शुरू हो गया | क्या राजनैतिक दल ,क्या कानूनी विशेषज्ञ सब एक साथ मैदान में आ गए |सब ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी | हद तो याहे की भाषा की सारी गारीमाँ ही भूल गए |कानूनी विशेषज्ञों ने टूजी घोटाले में विशेष अदालत के फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक वर्ग ने कहा कि बरी होना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह राजनीतिक रूप से स्थिति ज्यादा गंभीर कर देगा। वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि एक बुलबुला बनाया गया था, जो सुबूतों के अभाव में फट गया। पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा, बिना पढ़े वह फैसले को अच्छा या बुरा नहीं कह सकते हैं, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है।

वहीं राजनीतिक रूप से भी स्थिति गंभीर होगी। भविष्य में हम लंबा राजनीतिक स्पेक्ट्रम देखेंगे। सिन्हा ने विशेष अदालत के निष्कर्ष का जिक्र करते हुए कहा, सीबीआई ने बेहद जज्बे के साथ मुकदमा शुरू किया। लेकिन अंतिम चरण में विशेष पब्लिक प्रासिक्यूटर और सीबीआई के प्रासिक्यूटर अलग-अलग दिशाओं में चले गए, बिना किसी समन्वय के। हालांकि वरिष्ठ वकील विकास सिंह, हाईकोर्ट के पूर्व जज आरएस सोढ़ी की राय अलग है।
उनके मुताबिक वकीलों के पास मुकदमा साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्य ही नहीं थे। सोढ़ी ने कहा, सुबूतों में कमी थी। उनके पास मुकदमे के लिए सबसे अच्छे वकील थे। लेकिन मामले में ही कुछ नहीं था। एक बुलबुला बनाया गया था, जो अब फूट गया है। घोटाला बस इतना था कि पहले आओ पहले आओ को पात्रता कैसे पात्रता कैसे माना गया। तथ्यों के अभाव में वकील इसे भी साबित नहीं कर पाए और इसलिए सारे लोग बरी हो गए। सिंह ने कहा कि वे शुरू से कह रहे थे कि यह घोटाला नहीं है।
बता दे की 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी बरी हो गए हैं। लेकिन अब भी कई सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। ये सवाल सीएजी की रिपोर्ट और सीबीआई की जांच से निकले हैं। 21 दिसंबर को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सीबीआई इस मामले में दोषियों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रही है। लेकिन कुछ सवाल के जबाव अब भी नहीं मिले हैं।