35 लाख किसानों को नहीं मिलेगा सरकार की ‘भावांंतर’ योजना से लाभ

भोपाल.किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिले इसके लिए प्रदेश सरकार ने इस साल भावांतर भुगतान योजना लागू की है। लेकिन इस योजना का लाभ प्रदेश के 35 लाख किसानों को नहीं मिलने वाला। यह योजना सोयाबीन सहित 8 फसलों के लिए है। करीब 54 लाख किसान इन फसलों का उत्पादन करते हैं। इनमें से सिर्फ 19 लाख किसानों के पंजीकरण हुए हैं। योजना की सफलता के लिए सरकार को तिलहन और दलहन उत्पादन करने वाले सभी किसानों को पंजीकृत किया जाना चाहिए था पर हुए मात्र 33 प्रतिशत।
– योजना के लागू होने के तुरंत बाद व्यापारियों ने उपज के रेट कम कर दिए, नतीजा ये हुआ कि किसानों को योजना से पहले जितना पैसा मिल रहा था अब उतना भी नहीं मिल रहा है।किसानों को योजना लागू होने से पहले जो भाव मिल रहा था अब वो भी नहीं मिल पा रहा है।
यह पायलेट प्रोजेक्ट है
– चूंकि याेजना का पायलेट प्रोजेक्ट है। इसलिए किसानों ने सरकार के अनुमान के मुताबिक ही पंजीयन कराया है। लेकिन रवी की फसलों के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ जाएगी।
– डा. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव कृषि
देने थे 50 हजार रुपए नकद, मिले सिर्फ 10 हजार
– आगर मालवा कृषि मंडी में किसानों ने उचित मूल्य और नकद भुगतान नहीं मिलने पर चक्काजाम कर दिया। किसानों को 50 हजार रुपए नकद तथा बाकी राशि बाद में दी जानी थी। मंगलवार को उन्हें सिर्फ 10 हजार रुपए नकद दिए गए। अशोक नगर मंडी में भी किसानों ने प्रदर्शन किया।
2300 से ज्यादा नहीं मिल रहे दाम
– किसानों के मुताबिक 16 अक्टूबर को भावांतर योजना लागू होने से पहले उन्हें सोयाबीन का प्रति क्विंटल भाव 2800 रुपए मिल रहा था, लेकिन योजना लागू होने के बाद व्यापारी 2200-2300 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा देने के लिए तैयार नहीं हैं। व्यापारियों ने दाल और अन्य फसलों के भाव भी गिरा दिए हैं।
एमएसपी पर ही खरीदी अनिवार्य करें
– इस योजना का फायदा व्यापारी ही उठाएंगे। फसलों की कीमतें गिराकर वे किसानों और सरकार दोनों का नुकसान करेंगे। व्यापारियों के लिए अनिवार्य करना होगा कि वे एफएक्यू खाद्दान एमएसपी पर ही खरीदें।
जीएस कौशल, पूर्व संचालक कृषि