9वीं साइंस, 11वीं केमिस्ट्री का पर्चा लीक, खर्च से बचने रद्द नहीं की परीक्षा, एक सेंटर में पेपर बदला

कवर्धा. हायर सेकंडरी स्कूल मरका में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां से कक्षा 9वीं के साइंस और 11वीं केमेस्ट्री का पर्चा लीक हो गया। परीक्षा के 14 घंटे पहले सामने आए एक स्टूडेंट ने कॉल कर बताया कि उसने 4500 रुपए में पेपर खरीदा है। रविवार रात 10 बजे डीईओ सीएस ध्रुव को इसकी सूचना मिली। रातों-रात दूसरे ब्लू प्रिंट से नए प्रश्नपत्रों की छपाई हुई।

एक दिन पहले मिल चुकी थी पेपर लीक होने की सूचना

साेमवार सुबह 11 बजे नए प्रश्नपत्र के साथ सहायक संचालक एमके गुप्ता व उनकी टीम जांच के लिए स्कूल पहुंचे। लीक हुए पेपर से पर्चे का मिलान किया, तो हूबहू मिला। लीक हुए पेपर के बंडल को जांच के लिए कस्टडी में लिया। दोपहर 12 बजे उसी स्कूल में कक्षा 9वीं के 149 बच्चों ने साइंस और 11वीं के 49 बच्चों ने केमिस्ट्री के नए प्रश्नपत्रों से परीक्षा दिलाई। अन्य स्कूलों में भी परीक्षा ली गई, लेकिन हूबहू उसी पर्चे से, जिसके लीक होने की सूचना एक दिन पहले ही अफसरों को मिल चुकी थी। भास्कर के पास भी 9वीं के लीक हुए साइंस पर्चे की कॉपी मौजूद है। दोनों कक्षाओं का पर्चा लीक होने पर परीक्षा निरस्त करना संभव था, लेकिन खर्चे के बचने अफसरों ने ऐसा नहीं किया।

एक क्वेश्चन पेपर को छापने में 50 रुपए आता है खर्च

बताया जा रहा है कि एक प्रश्नपत्र की छपाई में 50 रुपए खर्च आता है। यहां तो 9वीं के 10,349 और 11वीं के 8,293 स्टूडेंट्स हैं। इतने छात्रों के लिए नया प्रश्नपत्र छपवाने में 9.32 लाख रुपए खर्च आ जाता। इसलिए हायर सेकंडरी स्कूल मरका को छोड़कर बाकी स्कूलों में लीक हुए हूबहू पर्चे से ही परीक्षाएं ली गई। इधर, अफसरों को शक है कि हायर सेकंडरी स्कूल मरका के प्रभारी प्राचार्य रामधुनी शर्मा ने पर्चा लीक किया होगा। क्योंकि स्कूल में प्रश्नपत्रों के सुरक्षा की संपूर्ण जवाबदारी प्राचार्य की होती है। बिना उसके पेपर आउट नहीं हो सकता। मामले में प्रश्नपत्रों को छपवाने से लेकर छात्रों तक बंटने की व्यवस्था की जांच की जाएगी। ताकि यह पता चल सके कि पर्चा कैसे लीक हुआ।

प्रभारी प्राचार्य पर मूल्यांकन से 3 साल का लगा है बैन
मरका स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामधुनी शर्मा का विवादों से पुराना नाता है। वर्ष 2015 में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के आंसर सीटों के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। मूल्यांकन में गड़बड़ी के चलते 10 शिक्षकों को 3 साल के लिए मूल्यांकन कार्य से बैन किया गया था, जिसमें प्रभारी प्राचार्य रामधुनी शर्मा भी शामिल हैं।

भास्कर नॉलेज: जानिए, प्रश्नपत्र छपवाने से लेकर स्टूडेंट्स तक बंटने की पूरी व्यवस्था
– जनवरी 2018 में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) रायपुर से 9वीं और 11वीं के प्रश्नपत्रों का ब्लू प्रिंट जिला शिक्षा विभाग को भेजी गई।
– फरवरी 2018 में शिक्षा विभाग ने ये ब्लू प्रिंट छपाई के लिए रायपुर के निजी प्रिंटर्स के पास भेजी।
– मार्च 2018 में प्रश्नपत्र छपकर वापस शिक्षा विभाग में पहुंची।
– 21 मार्च 2018 में इन प्रश्नपत्रों की पैकेटिंग सीलबंद कर संबंधित स्कूलों में भेजी गई, जहां आलमारी में इसे रखा गया।
– 9 अप्रैल को परीक्षा के दिन सुबह 11 बजे निरीक्षक सील खोलते हैं और दोपहर 12 बजे पेपर्स स्टूडेंट्स को बांटे जाते हैं।

मिलान से पर्चा लीक होने की पुष्टि
शिक्षा विभाग के सहायक संचालक एमके गुप्ता ने बताया कि सोमवार को परीक्षा के एक घंटे पहले जांच के लिए स्कूल पहुंचे। वायरल हुई कॉपी और असल प्रश्नपत्र के मिलान से पर्चा लीक होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उस स्कूल में नए प्रश्नपत्र बांटे गए। मामले की गहनता से जांच की जाएगी।
प्रभारी प्राचार्य पर शक है, जांच जारी है
कबीरधाम के डीईओ सीएस ध्रुव ने बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रभारी प्राचार्य पर थी। उसी पर शक है। जांच की जा रही है कि उनकी किसी से मिलीभगत तो नहीं। पेपर लीक होने की पुष्टि हुई है। प्रश्नपत्र छपाई का खर्चा बहुत आता है, इसलिए सिर्फ उसी स्कूल में नए प्रश्नपत्रों से परीक्षा ली गई।