CG में थम नहीं रहा आंदोलनों का दौर, मोर्चा लेने को तैयार हैं कई संगठन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चुनावी साल आंदोलनों का साल बनता जा रहा है। अभी शिक्षाकर्मियों की मांग पूरी कर सरकार राहत की सांस ले भी नहीं पाई थी कि लगातार कई आंदोलन शुरू हो गए। अब तक चल रहे आंदोलन शांत नहीं हुए हैं और दूसरे कई संगठन भी आंदोलन में कूदने को तैयार खड़े हैं।

इन आंदोलनों से सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। हालांकि सरकार की रणनीति यही दिख रही है कि अब किसी की मांग पर कान न दिया जाए। अब शुरू हुए आंदोलनों में सबसे बड़ा आंदोलन अनियमित, दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मी आदि कर्मचारियों का है।

ये कर्मचारी अलग-अलग विभागों में अलग-अलग पदों पर काम कर रहे हैं। इनकी नियुक्ति पूरी तरह कांट्रेक्ट के आधार पर की गई है। लेकिन शिक्षाकर्मियों का संविलियन होने के बाद इनकी आस जाग गई। अनियमित कर्मचारी मान रहे हैं कि जैसे शिक्षाकर्मियों को पहले सरकारी कर्मी बनने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन लगातार संघर्ष से सफलता मिल गई वैसे ही उन्हें भी सफलता मिल सकती है।

सोशल मीडिया में यही संदेश चले कि किसी भी कीमत पर झुकना नहीं है। लगातार संघर्ष करना है। देखते ही देखते अलग-अलग विभागों के सवा लाख कर्मचारी एकजुट हो गए। इन कर्मचारियों में कई ऐसे हैं जो अपने विभागों में बेहद अहम हैं। इनके आंदोलन पर उतरने से काम प्रभावित होने की पूरी संभावना है। हालांकि इनकी नियुक्ति जिन नियमों के तहत हुई है उनमें सरकार इनकी मांग सुनने को कतई बाध्य नहीं है।

सरकार चाहे तो इन्हें नौकरी से बाहर कर दूसरे कर्मचारी नियुक्त कर ले। फिर भी अनियमित कर्मचारियों ने आर पार की लड़ाई का हौसला दिखाया है तो उसकी वजह यह है कि उन्हें मालूम है-चुनावी साल में सरकार इतने लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी। 12 जुलाई को ये कर्मचारी अपने दफ्तरों में काली पट्टी बांधकर पहुंचे।

25 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान भी किया है। इनके अलावा विद्यामितान भी आंदोलन की राह पर हैं। विद्याामितान की नियुक्ति प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए की गई है। यानी ये सरकार के कर्मचारी किसी भी हाल में नहीं हैं। लेकिन विद्यामितान कह रहे कि वे इसी राज्य के नागरिक हैं।

उनकी वजह से स्कूलों में विज्ञान, गणित, कामर्स की पढ़ाई हो पा रही है। उनके आने के बाद स्कूलों के नतीजे भी सुधरे। तो सरकार क्यों उन्हें शिक्षाकर्मी बना देती। यह देखने वाली बात होगी कि सरकार उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेती है। विद्यामितान 13 को जल सत्याग्रह करेंगे।

इधर स्वास्थ्य संयोजकों ने भी समान काम समान वेतन का राग छेड़ दिया है। 17 जुलाई को स्वास्थ्य संयोजक राजधानी में प्रदर्शन करेंगे। कोटवार संघ, तेंदूपत्ता फड़ प्रबंधक, ठेकेदार संघ, पीडीएस विक्रेता संघ जैसे कई संगठन पहले से आंदोलन की राह पर हैं।

पहले से चल रहे आंदोलन थमे नहीं हैं

प्रदेश में पहले से चल रहे आंदोलन दब जरूर गए हैं लेकिन आग ठंडी नहीं हुई है। नर्सों के आंदोलन को दबा दिया गया। सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी गठित कर दी है। पुलिस परिवारों के आंदोलन को भी दबा दिया गया।

अब उनकी कई मांगों को पूरा करने की तैयारी भी है लेकिन सोशल मीडिया में अब भी पुलिस परिवारों की मुहिम जारी है। पुलिस कर्मियों की पत्नियां कह रहीं कि कम से कम काम के घंटे तो तय हों।

शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो गया लेकिन क्रमोन्नत और समयमान वेतनमान, आठ साल की सेवाशर्त खत्म करने जैसे मुद्दों को लेकर अब भी नाराजगी बनी हुई है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाया गया। हालांकि वे भी चाहती हैं कि उन्हें दूसरे सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन और अन्य सुविधाएं मिलें। ऐसा ही दूसरे कर्मचारी संगठनों के लिए भी है। सरकारी कर्मचारी भी महंगाई भत्ता, सातवें वेतनमान का एरियर्स आदि मांगों को लेकर अगस्त से आंदोलन पर जाने की तैयारी में हैं।