Demonitization के बाद डिजिटल पेमेंट में तेज़ी

पिछले साल नवंबर में हुई नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट में भारी इजाफा हुआ है। इससे जुड़े आंकड़ों की मानें तो यह उछाल 2017-18 में 80 प्रतिशत के करीब रहेगा। सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में कुल एक हजार करोड़ रुपए की पेमेंट डिजिटल रूप से की गई थी, लेकिन इस साल यह आंकड़ा अक्टूबर तक ही छू लिया गया है। ऐसे में उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष के खत्म होने तक यह 1,800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया है कि जून, जुलाई और अगस्त में औसतन 136-138 करोड़ रुपए की पेमेंट ऑनलाइन की गई। संसद की फाइनेंस स्टेंडिंग कमेटी ने जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक नोटबंदी के बाद से भीम, आईएमपीस, एम वॉलेट, डेबिट कार्ड सबके जरिए होने वाली पेमेंट में लगातार बढ़त देखने को मिली है।

पिछले साल इसी महीने की आठ तारीख को पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। तब 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद कर दिया गया था। इसके साथ ही 500 और 2000 रुपए के नए नोट लाए गए थे। इतने सारे नोट बंद होने की वजह से कैश की किल्लत हो गई थी, तब से ही लोगों ने ऑनलाइन का रुख किया।

खबरों की मानें तो एक साल पूरा होने के बाद भी बाजारों में रौनक अब भी पूरी तरह नहीं लौटी है। पिछले दिनों कुछ रौनक लौटी भी तो जीएसटी ने व्यापारियों के हालत खराब कर दी। ग्राहक सिर्फ अपने जरूरत के सामान ही खरीद रहे हैं। व्यापारियों की मानें तो त्योहारों के दौरान भी व्यापार में उछाल नहीं देखने को मिला। इसके पीछे वे नकद राशि की कमी को मुख्य वजह बता रहे हैं।