JLF 2016: शेक्सपीयर के मामले में हॉलीवुड से आगे है बॉलीवुड

जयपुर. शेक्सपीयर को पढ़ा नहीं जा सकता है, उसे सिर्फ जीया जा सकता है। अगर किताब पढऩे से शेक्सपीयर के नाटक समझ में आते तो ‘हेमलेट’ सरीखे उनके अनेक नाटकों के दौरान भीड़ नहीं उमड़ती। अगर उनकी किताबों को ना समझ पाने की शिकायत का समाधान चाहिए तो 4-5 लोगों के समूहों में उसकी किताब से जुड़ी हर लाइन पर रिहर्सल करें, तब ही सही मायनों में शेक्सपीयर के दिल से लिखी आवाज को समझ पाओगे, वरना हाथ मलते रह जाओगे। यही वो परिभाषा थी, जिससे ‘शेक्सपीयर इन अमरीका’ सेशन में जाने-माने लेखक जेस शैपिरो ने साहित्यप्रेमियों को रूबरू करवाया।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर यह माना जाता है कि शेक्सपीयर को बुक रीडिंग करके समझा जा सकता है, जो आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि शेक्सपीयर के फिल्मांकन के मामलों में आज भी हॉलीवुड बहुत पीछे है, जबकि इन्हीं मामलों में बॉलीवुड उससे आगे निकल चुका है।

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