महाशिवरात्रि: जानिए सर्वार्थ सिद्ध योग और सिद्ध योग का महत्व

भगवान शंकर के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि सबसे बड़ा दिन और पर्व होता है। शिव पूजा का सबसे बड़ा और पावन दिन महाशि‍वरात्र‍ि को माना गया है। शिव पुराण के मुताबिक यह दिन उनके साधकों और भक्तों के लिए मनोकामनाओं की पूर्ति और भक्ति का सबसे उत्तम दिन होता है।

दो दिनों की महाशि‍वरात्रि में इस बार तीन विशेष योग

इस साल 24 फरवरी को महाशिवरात्रि है। विशेष बात यह है कि इस बार महाशिवरात्रि विशेष संयोग में मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि शुक्रवार की है जिस दिन पूरे तीन विशेष योग बने हैं। दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व इस बार सवार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे से शुरू होगी, जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। इसलिए दोनों दिनों तक महाशिवरात्रि मानी जाएगी।

25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत है। महाशिवरात्रि को अर्द्ध रात्रि के समय ब्रह्माजी के अंश से शिवलिंग प्रकट हुआ था, इसलिए रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी का ज्यादा महत्व होता है। इस वर्ष सबसे विशेष बात यह है कि दोनों दिन सिद्ध योग पड़ रहे हैं। 24 फरवरी को सर्वार्थ सिद्ध योग तथा 25 फरवरी को सिद्ध योग पड़ रहा है। 24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि के शुरू होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी, लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने की वजह से भोले के महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी, बल्कि यह अत्यंत शुभकारी होता है। इसलिए इस बार की महाशि‍वरात्रि आप चाहे दो दिनों तक मना सकते हैं। हालांकि ज्यादातर लोग 24 फरवरी को ही इसे मनाएंगे। सर्वार्थ सिद्ध योग और सिद्ध योग में भगवान शंकर की पूजा विशेष फल प्रदायिनी है। इसलिए दोनों दिनों में भगवान शंकर की अराधना विशेष रुप से लाभकारी है।

पूजा और मुहूर्त का समय

निशिथ काल पूजा- 24:08 से 24:59
पारण का समय- 06:54 से 15:24 (25 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 21:38 (24 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 21:20 (25 फरवरी)

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