दुनिया की 8 सबसे खतरनाक जेल, कैदियों के साथ क्रूरता में सबको छोड़ा पीछे

ऑस्ट्रेलिया के मशहूर डीजे जैक मस्टोरियानी को ड्रग्स के मामले में थाईलैंड में दो साल की जेल हो गई है। उसे खतरनाक बांग क्वांग जेल में ट्रांसफर कर दिया गया है। यहां अब उन्हें तीन महीने बेड़ियों में जकड़े रहना पड़ेगा और पूरे दिन में सिर्फ एक प्लेट चावल खाने के लिए दिया जाएगा। ये जेल ब्रूटल टॉर्चर के लिए जानी जाती है। हालांकि, ये कोई पहली या अकेली ऐसी जेल नहीं है। टॉर्चर के मामले में नॉर्थ कोरिया, रवांडा, पेरू और जॉर्जिया की जेलें भी पीछे नहीं हैं। यहां हम दुनिया की ऐसी ही खतरनाक जेलों के बारे में बता रहे हैं।

कैम्प 22 (होरेयांग कंसन्ट्रेशन कैंप),
नॉर्थ कोरिया

नॉर्थ कोरिया की इस बदनाम जेल को कैम्प 22 के नाम से जाना जाता है। ये देश पूरी दुनिया से कटा हुआ है, इसलिए जेल में बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां पॉलिटिकल बैकग्राउंड वाले कैदी रखे जाते हैं। टॉर्चर के लिए मशहूर हिटलर के ऑशविच कैंप से इसकी तुलना होती है। यहां कैदियों को दिन के 14,15 या 16 घंटे काम करना पड़ता है। खाना न मिलने पर उन्हें छिपकली, सांप और चूहे से लेकर सबकुछ खाना पड़ता है। सैटेलाइट फोटोग्राफ के मुताबिक, जेल में 50,000 कैदियों को रखने की क्षमता है।

टैडमोर मिलिट्री प्रिजन,
पल्मायरा, सीरिया

एमेनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, ये मिलिट्री प्रिजन दुनिया की खतरनाक और बदनाम जेलों में से एक है। 1980 में इस जेल में हुआ नरसंहार सबसे भयानक था, जब प्रेसिडेंट हाफिज अल-असद ने जवानों को मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध रखने वाले सभी कैदियों को जान से मारने के ऑर्डर दे दिए। दरअसल, हाफिज पर ब्रदडहुड के लोगों ने हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 800 लोगों ने जान गंवाई थी। 2001 में इसे बंद कर दिया गया, लेकिन 2011 में इसे दोबारा खोल दिया गया। हालांकि, क्रूरता के मामले यहां अब भी कम नहीं हुए।

एल रोडियो,
गुआतिर, वेनेजुएला

वेनेजुएला में बढ़े क्राइम रेट के चलते पिछले साल इस जेल में कैदियों की संख्या 50 हजार के करीब पहुंच गई थी। इनमें से करीब आधे से ज्यादा ज्यादा अब भी सजा का इंतजार कर रहे हैं। इस ओवरलोडेड जेल को लेकर शावेज ने खुद कहा था कि ये जगह किसी नर्क के दरवाजे से कम नहीं। जेल में कैदियों के पास ग्रेनेड और गन आम है। यहां कैदियों के विरोधी गुट एक दूसरे को टॉर्चर करते हैं। कई बार यहां शूटआउट में कैदियों की जान जा चुकी है।

गीतारामा सेंट्रल जेल, रवांडा

रवांडा की गीलाराम सेंट्रल जेल धरती पर किसी नर्क से कम नहीं है। एलए टाइम्स ने इसे लेकर एक बार कहा था कि इसके नर्क बनने में अब कुछ भी बाकी है। यहां प्रति स्क्वेयर यार्ड में चार लोग रह रहे हैं। 400 लोगों के लिए बनाए गए जेल में 1990 तक ही कैदियों की संख्या 7000 हो गई थी। हालात ये हैं कि खड़े-खड़े दिन गुजारना पड़ता है। गंदगी और सीलन भरी जगहों के चलते गैंगरीन जैसी बीमारियों से कैदियों के हाथ पैर सड़ जाते हैं। हालात ये हैं बीमारियों से आए दिन यहां कैदियों की मौत के मामले सामने आते हैं। दावा तो ये तक किया जाता है कि यहां कैदियों ने मरे हुए कैदियों का मांस खाने के लिए छिपाकर रखा था।

गलदनी प्रिजन,
तिबलिसी, जॉर्जिया

सितंबर 2012 में जॉर्जिया की इस जेल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें 8 कैदियों को गार्ड क्रूर तरीकों से टॉर्चर करते नजर आ रहे थे। इनमें रेप और हिंसक सेक्शुअल असॉल्ट शामिल था। देश में जीरो टॉलरेंस के चलते यहां क्राइम रेट घट गया हो, लेकिन कैदियों की संख्या काफी ज्यादा है। नतीजा ये है कि जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी रह रहे हैं और यहां उन्हें बुरी तरह से टॉर्चर किया जा रहा है।

सान जुआन दी लूरीगांचो,
लीमा, पेरू

इसे कैदियों के लिए साउथ अमेरिका की सबसे मुश्किल जेल में से एक माना जाता है। 2500 कैदियों के लिए बनी इस जेल में 7000 कैदी रह रहे हैं। यहां सभी कैदियों को एक साथ रखा जाता है, चाहे वो किसी खतरनाक जुर्म में अंदर आया हो या फिर छोटे-मोटे क्राइम में जेल आया हो। इसीलिए यहां से हिंसा और मर्डर की आए दिन खबरें आती रहती है। 1986 में हुई यहां जेल ब्रेक की घटना के बाद अथॉरिटीज ने 90 कैदियों की जान ले ली थी।

रिकर्स आइलैंड प्रिजन,
न्यूयॉर्क, अमेरिका

1990 में हिंसा के चलते ये जेल सुर्खियों में आई। यहां मर्डर, चाकूबाजी और बाकी हमले आम बात हैं। ये सब यहां के भ्रष्ट गार्ड्स की शह पर होता है। यहां गार्ड के सामने ही 18 साल के कैदा क्रिस्टोफर रॉबिन्सन की एक कैदी ने जान ले ली थी। ये दुनिया की सबसे मुश्किल जेलों में से एक है। जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ था। हालांकि, बाद में जेल में काफी सुधर कार्य कराए गए।

बांग क्वांग प्रिजन,
बैंकॉक, थाईलैंड

थाईलैंड के बैंकॉक में मौजूद इस जेल को डेली टॉर्चर के लिए जाना जाता है। यहां कैदियों के लिए काफी छोटे सेल बने हैं। शुरुआत के तीन महीने यहां लोहे की बेड़ियों और जंजीरों में रखा जाता है। दिनभर में सिर्फ एक बार कैदियों को जेल की तरफ से एक प्लेट चावल वेजिटेबल सूप के साथ दिया जाता है। मौत का सजा का इंतजार कर रहे कैदियों को एक ही जगह पर बांधकर रखा जाता है। साथ ही, फांसी देने के सिर्फ 2 घंटे पहले ही उन्हें इसकी खबर दी जाती है।

Leave a Reply