MOVIE REVIEW: ‘एक्स-मैन: एपोकलेप्स’

आपको बता दे कि सोलह साल में नौ फिल्में, चार दर्जन से अधिक किरदार और तीन बिलियन डॉलर (एक्स-मैन, वर्ष 2000) से अधिक का कारोबार करने वाली एक्स-मैन सीरिज की पहली फिल्म से लेकर ताजा रिलीज ‘एक्स-मैन : एपोकलेप्स’ का क्रेज जरा भी कम नहीं दिखता।

हालांकि पिछले कुछ किस्तों की तरह इस किस्त में भी इस सीरिज के फैन्स लोगन/वुल्वरिन (ह्यू ग्रांट) को जरूर मिस करेंगे। बावजूद इसके नए युवा कलाकारों के कंधों पर टिकी एक्शन की इस बिसात में रोमांच के चाहने वाला का दिल खोल कर स्वागत है।

ये कहानी शुरू होती है सैंकड़ों साल पहले मिस्र के एक पिरामिड में शक्ति परिवर्तन से। सबाह नूर/एपोकलेप्स (ऑस्कर इसैक) अपनी शक्तियों को अमर करने की कवायद में जुटा है, तभी बगावत हो जाती है और उसकी पूरी सल्तनत उसी पिरामिड के साथ धरती के गर्भ में समा जाती है। सन 1983 में वह फिर से जाग जाता है और इस वाकिये की एकमात्र गवाह है सीआईए की एक एजेन्ट मोआइरा (रोज ब्रायन)। दूसरा जन्म लेने के बाद एपोकलेप्स सबसे पहले अपने चार सेनापतियों को जिंदा करना चाहता है, जिसके लिए उसे म्यूटेंट की ताकत का सहारा लेना पड़ता है।

सबसे पहले उसकी नजर ओरो पर पड़ती है, जो उसे सायलेक/एलिजाबेथ (ओलिविया मुन्न) से मिलवाती है और फिर उड़ने वाले म्यूटेंट एंजिल से भी। अंतिम सेनापति के लिए सबाह की तलाश मैग्नेटो (माइकल फास्सबेंडर) पर खत्म होती है, जो अपनी पत्नी और बेटी की मौत के बाद एक खतरनाक म्यूटेंट बन चुका है।

इन सब लोगों के साथ अब एपोकलेप्स चार्ल्स जेनिवयर (जेम्स मैकॉए) की उस दुनिया पर हमला करना चाहता है, जिसके तहत म्यूटेंट की काबिलियत को एक नई दिशा देने की तैयारी बरसों से चल रही है।

सबाह, चार्ल्स के दिमाग पढ़ लेने और लाखों-करोंड़ों लोगों एवं म्यूटेंट से सीधे बात कर लेने की क्षमता का कायल हो जाता है। वह चार्ल्स को अपने साथ ले जाता है और पूरी दुनिया के परमाणु अस्त्रों को अंतरिक्ष में भेज कर नष्ट भी कर देता है। चार्ल्स को बचाने के लिए रावेन/मिस्टिक (जेनिफर लारेंस) की अगुवाई में हैंक मैकॉय (निकोलस हॉल्ट), स्कॉट समर्स (टाय शर्डियन), जेन ग्रे (सोफी टर्नर), पीटर मैक्सिमॉफ/क्विक सिल्वर (इवान पीटर्स) और कर्ट/नाइटक्रालर (कोडी स्मिथ-मैकफी) मिल-जुलकर एपोकलेप्स के खिलाफ जंग छेड़ देते हैं।

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