MP : हमेशा यादव की प्रतिष्ठा की सीट रही है कसरावद विधानसभा

खरगोन/ कसरावद, नईदुनिया प्रतिनिधि । कसरावद विधानसभा में किसी भी विधानसभा में चाहे भाजपा या कांग्रेस, किसी भी पार्टी का उम्मीदवार जीता हो परंतु प्रदेश स्तर पर इस सीट को दिग्गज कांग्रेस नेता सुभाष यादव की सीट की नजर से देखा जाता रहा है। हालांकि सुभाष यादव अपनी जिंदगी का आखिरी चुनाव इसी सीट से उस वक्त हारे जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर थी।

वर्तमान में यहां उनके बेटे सचिन यादव ने जीतकर अपने पिता की हार का बदला लिया। उन्होंने पूर्व विधायक आत्माराम पटेल को पराजित किया। इस सीट पर कांग्रेस के सचिन यादव के होने से विपक्षी माहौल बना रहा। इस क्षेत्र में विकास कार्यों के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप और प्रदर्शन भी कम नहीं हुए। भाजपा एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाने में लगी है। उधर सचिन भी लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय बने हुए हैं। यहां स्वीकृत हुई परियोजनाएं चुनाव का आधार बनेंगी।

मतदाताओं पर एक नजर –

कुल मतदाता -207825

मतदान केंद्र -258

पुरुष मतदाता -107010

महिल मतदाता -100811

थर्ड जेंडर -4

वर्तमान में मैदानी स्थिति –

भाजपा-कांग्रेस में होगा घमासान होना तय –

कांग्रेस खेमे की सीट होने से भाजपा सत्ता के बल पर इस सीट पर अपना कब्जा जमाने का प्रयास करेगी। वहीं यादव बंधुओं की परंपरागत इस सीट पर सचिन यादव भी वापस अपना दांव आजमा सकते हैं। पूर्व चुनाव में प्रत्याशी रहे आत्माराम पटेल विधायक रहे होने के कारण एक बार फिर अपने टिकट के प्रति आश्वस्त हैं। परंतु यहां अन्य उम्मीदवार भी सचिन को टक्कर देने के लिए दावा पेश करने में जुटे हैं। इन सबके बीच यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान होने के आसार हैं।

बड़े वादे और स्थिति –

तीन सिंचाई परियोजनाओं की घोषणा स्वीकृति में बदली। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें व पुलियाओं के निर्माण की मिली स्वीकृति। एसडीएम और अन्य कार्यालय भवनों के निर्माण के साथ कर्मचारियों की प्रतिपूर्ति की स्वीकृति। स्वास्थ्य केंद्रों के उन्न्यन के लिए प्रयास जारी लेकिन घोषणाओं के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्र में बड़े उद्योग नहीं आ सके। बोरावां में स्टेडियम नहीं बन सका।

क्षेत्र की बड़ी समस्या –

अवैध खनन पर नहीं हो पा रहा नियंत्रण। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं व स्टाफ की कमी। महाविद्यालय में नए संकाय नहीं हो पा रहे संचालित। केंद्रीय विद्यालय भवन नहीं बन पाया।

2018 के संभावित प्रत्याशी –

भाजपा : आत्माराम पटेल (पूर्व विधायक), राजेंद्र यादव (पूर्व जिलाध्यक्ष)

कांग्रेस : सचिन यादव (विधायक), अरुण यादव (पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष)

जातीय समीकरण –

यादव समाज के अलावा यहां पाटीदार, राजपूत व पटेल समाज राजनीतिक रूप से दबदबा रखते हैं।

फैक्ट फाइल –

2013 का परिणाम –

सचिन यादव -कांग्रेस -79685

आत्माराम पटेल -भाजपा -67880

पिछले चुनावों में मिले वोट –

पार्टी -2003 -2008

कांग्रेस -52.71 -36.30

भाजपा -39.93 -54.18

(वोट प्रतिशत में)

आमने सामने –

विधायक से सीधी बात –

तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के प्रयास को हमने सार्थक किया। तीन बड़ी परियोजनाओं के साथ तालाब विस्तार किए। वर्षों पुरानी मांग में एसडीएम कार्यालय सहित अन्य शासकीय भवन निर्माण स्वीकृत कराए। कई योजनाओं व निर्माण कार्यों को लेकर शासन पक्षपातपूर्ण दोहरा व्यवहार करता है। कई मांगें शासन स्तर पर अब भी लंबित हैं।

सचिन यादव, कांग्रेस विधायक, कसरावद

दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी का मत –

शासन ने निष्पक्ष तौर पर योजनाएं इस क्षेत्र में दी हैं। विधायक विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दे रहे। कई बार ग्रामीण व क्षेत्रवासियों को इस प्रक्रिया से नुकसान हुआ है। अधिकांश योजनाएं भाजपा सरकार ने स्वीकृत व प्रस्तावित की हैं। आगामी चुनाव में मतदाता इसका जवाब देंगे