MP Police VIP Guest : नाग कन्या बनकर सोनाली देती थी अफसरों को झांसा, काली का रूप भी करती थी धारण

इंदौर.खुद को एडीजी की बहन बताकर पुलिस अफसरों को 10 साल तक अपने इशारों पर नचाने वाली शातिर सोनाली शर्मा मामले में नित नए खुलासे हो रहे हैं। रिमांड पूरी होने पर सोनाली को जेल भेज दिया गया है, लेकिन उसका एक और कारनामा सामने आया है। पुलिस की वीआईपी गेस्ट सोनाली तंत्र-मंत्र का सहारा भी लेती थी। वह खुद को नाग कन्या बताकर अधिकारियों को झांसे में लेती थी। वह काली का रूप भी धर लेती थी। उसके इसी अंधविश्वास में कई अफसर और नेता फंसे हुए थे।

अंधेरे का फायदा उठाकर बनती थी नाग कन्या

– सूत्रों की माने तो सोनाली के मोबाइल पर 480 नंबर अफसरों और नेताओं के नंबर मिले हैं। सोनाली खुद को नाग कन्या बताती थी और इन नेता और अफसरों को बुलाकर तंत्र-मंत्र के जरिए लोगों को चकमा देती थी। वह कई बार काली का रूप धर इन नेताओं और अफसरों के सामने आती थी। बताया जा रहा है कुछ साल पहले यह उज्जैन स्थित विक्रांत भैरव मंदिर के पीछे जंगल में और भोपाल के रतीबड़ क्षेत्र में तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर लोगों को बेवकूफ बनाती थी। यह जंगल में अंधेरे का फायदा उठाकर 4 से 6 हाथ दिखाया करती थी। असल में ये हाथ उसके पीछे बैठी लड़कियों के होते थे। यहां पकड़े जाने पर के बाद वहां से गायब हो गई थी। सोनाली करीब 15 साल से यह लोगों को झांसा देती आ रही है।

इटारसी में गिरफ्तार हुई तब किन्नर थी, सर्जरी करवाकर महिला बनी
– पूछताछ में यह भी पता चला है कि इटारसी में नकली एसडीएम बनकर घूमने के मामले में गिरफ्तार हुई तो मेडिकल करवाया गया था। तब रिपोर्ट में सोनाली की पहचान एक किन्नर के रूप में हुई थी। बाद में कनवर्ट करवाकर वह शी-मेल (महिला) बन गई थी।

एसपी रैंक के अफसर की गाड़ी लेकर शहरभर में घूमती थी
– सूत्रों के मुताबिक सोनाली ने इंदौर में कई बार एसपी रैंक के अफसरों की गाड़ी का भी इस्तेमाल किया है। हाल ही में एसपी रैंक के अफसरों को नई गाड़ियां मिली हैं, लेकिन जो उनकी पुरानी एंबेसेडर कार थी वह डीआरपी लाइन में थी जिसे एमटी शाखा के श्यामसुंदर द्वारा एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर सोनाली के लिए उपलब्ध करवाया जा चुका है। इसी कार में बैठकर वह रौब जमाती थी। अफसर यह जांच रहे हैं कि किस अफसर के कहने पर ये कार सोनाली को मिली थी। एसपी पश्चिम विवेक सिंह के मुताबिक सोनाली ने यह भी बताया कि मैस में कभी कोई किसी के आने पर आईडी कार्ड या अन्य जानकारी नहीं लेता है, इसलिए उसी का फायदा उठाने लगी थी।

जिम, फिल्में, कपड़ों की सुविधा देने वालों पर भी होगी कार्रवाई
– इधर, जांच कर रहे अफसरों ने स्पष्ट किया है कि सोनाली को पुलिस रुतबे के कारण जो भी टीआई मुफ्त में जिम ले जाते थे, उसके लिए फिल्मों के टिकट का इंतजाम करते थे, कपड़ों की खरीदी करवाते थे, उन सभी को जांच में लिया है। जल्द ही सभी पर बिना जानकारी के सुविधाएं देने पर भी कार्रवाई हो सकती है। सोनाली पूर्वी थाने के एक टीआई की काफी करीबी रही है। टीआई ने उसे न सिर्फ थाने का ड्राइवर उपलब्ध करवा रखा था बल्कि उसके लिए कई बड़े खर्चे भी किए थे। सूत्रों की मानें तो टीआई के साथ उसकी कई सेल्फी और कई अलग-अलग फोटो भी उसके पास हैं। वहीं इस टीआई से वह 10 लाख से ज्यादा का खर्च भी रौब दिखाकर करवा चुकी है।

कई टीआई को रुतबा दिखाकर करवाया काम
– सोनाली से संपर्क में शहर के छोटी ग्वालटोली टीआई संजू कामले, टीआई राजकुमार यादव, टीआई गिरीश कवरेती, भंवरकुआं टीआई शिवपालसिंह कुशवाह, पूर्व आरआई सुनील दीक्षित भी रहे हैं। टीआई संजू कामले ने बताया मुझे भी वह एडीजी की बहन बताकर मिली थी। मेरे थाने का एक कांस्टेबल उसके साथ रहा था। उसी कारण मेरी पहचान हुई थी। इन सभी को एडीजी की बहन होने का रुतबा दिखाकर काम करवा चुकी है।

इसलिए जमाती रही रौब : न खुफिया विभाग ने सतर्कता बरती न आईजी एसएएफ, कमांडेंट ने दिखाई गंभीरता

सोनाली के पुलिसिया रौब जमाने के पीछे पुलिस विभाग की चार स्तर की लापरवाही है। यही कारण है कि ऑफिसर मैस में 10 साल लगातार आने-जाने के बाद भी पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी।

1. मामले में सदर बाजार थाने के खुफिया स्क्वाड की भी लापरवाही सामने आई है। ऑफिसर मैस होने के बाद भी खुफिया विभाग के जवान कभी यह जानने नहीं पहुंचे कि यहां कोई अज्ञात व्यक्ति तो नहीं ठहरा या जो अधिकारियों के रिलेटिव हैं, वे सही में उनके परिचित हैं या नहीं।

2. आईजी एसएएफ, आईजी महिला अपराध, कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट और खुद मैस वाले बाहरी लोगों को लेकर कभी सतर्क नहीं दिखे।

3. मैस में फोन पर ही रूम बुक करने की अव्यवस्था का सोनाली ने फायदा उठाया। कई अज्ञात नंबरों से उसने मैस में अधिकारियों के नाम से फोन कर रूम भी बुक करवाए थे।

4. सीआईडी की टीम भी कभी मैस को लेकर गंभीर नहीं दिखी। यहां बड़े-बड़े अधिकारियों के ठहरने पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था की चिंता भी नहीं की गई।

सीधी बात एडीजी पवन श्रीवास्तव

हां, उससे फोन पर बात होती थी पर 130 कॉल की बात झूठ

सवाल : आप सोनाली से परिचित हैं। फोन पर कई बार बात की?
– हां, 2-3 महीनों में 3 से 4 बार फोन पर बात हुई है। मुझे भी वह एडीजी की सिस्टर बताकर बात करती थी। 130 कॉल की बात झूठ है।
सवाल : आपने डीआरपी लाइन से उसे दो बार गाड़ी भी उपलब्ध करवाई थी?
– मैंने उसे कभी कोई गाड़ी उपलब्ध नहीं करवाई। वैसे डीआरपी लाइन से मैं सीधे गाड़ी के लिए बोल भी नहीं सकता। या तो हम संबंधित डीआईजी से कहेंगे या एसपी रैंक के अफसर से बात करेंगे।
सवाल : 30 अप्रैल को ऑफिसर मैस में आपकी ओर से आयोजित की गई पार्टी में सोनाली शर्मा भी शामिल थी?
– मैस की पार्टी हमारी पारिवारिक पार्टी थी। विधिवत अनुमति लेकर मैस बुक किया था। उस दौरान सोनाली वहां ठहरी थी लेकिन पार्टी में शामिल नहीं हुई। पार्टी भी सिर्फ डिनर की थी।

इधर डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने इन सबका कारण यह बताया…
समाज बदल रहा है, कम्युनिकेशन के तरीके बदल रहे हैं, इसलिए ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

प्रथम बटालियन के कमांडेंट मनीष अग्रवाल

सोनाली मैस में कभी ठहरी नहीं, बस आती-जाती रही

सवाल : मैस में काफी खामियां हैं, जिसका सोनाली ने फायदा उठाया?
– सोनाली कभी यहां ठहरी नहीं, बस आती-जाती रही है।
सवाल : यहां फोन पर ही लोगों को ठहरा लिया जाता है, क्या सही है?
– ज्यादातर अफसर रुकते हैं, इसलिए फोन पर रूम बुक कर लेते हैं।