मोदी करवायेगे मुफ्त इलाज़ जानिए कैसे

केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में दवा और जांच की मुफ्त व्यवस्था होगी। प्रति एक हजार लोगों पर अस्पतालों में दो बिस्तरों का इंतजाम होगा। स्वास्थ्य नीति के तहत सरकार को ट्रिब्यूनल गठित करने का अधिकार होगा, जहां इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं से असंतुष्ट मरीज की शिकायतों का निपटारा होगा। सरकार सभी के लिए इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड रखने की भी व्यवस्था बनाएगी।

नई नीति के तहत सरकार ने जीडीपी का 2.5 फीसदी स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने का फैसला किया है। साथ ही योग को स्कूलों और कार्यस्थलों पर और व्यापक तौर पर पहुंचाया जाएगा। सरकार अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं पर जीडीपी का 1.5 फीसदी ही खर्च करती थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को मंजूर की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत भारतीयों की औसत उम्र 67.5 से से बढ़ा कर 70 वर्ष करने का इरादा है। साथ ही सभी सरकारी अस्पतालों में दवा और जांच की मुफ्त व्यवस्था होगी।

लोकसभा और राज्यसभा में स्वास्थ्य नीति पर सरकार का नजरिया पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि इससे उन लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी, जिन तक यह ठीक से नहीं पहुंची हैं। स्वास्थ्य नीति में 2025 तक पांच साल से कम उम्र की शिशु मृत्यु दर 23 तक सीमित करने का इरादा है। वहीं 2020 तक प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर शून्य तक पहुंचाने की योजना है।

इस नीति के तहत बीमारियों की रोकथाम के उपायों और हेल्थकेयर को बढ़ावा देने से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक सबकी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। बीमार के उपचार के बजाय स्वस्थ रखने के लिए वेलनेस कार्यक्रमों पर फोकस होगा। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को हासिल करने में लोगों को आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इस नीति के तहत जनजाति समुदाय के परंपरागत दवाओं पर शोध होगा और प्रमाणीकरण के बाद देश भर में इनका इस्तेमाल होगा। सरकार सभी के लिए इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड रखने की भी व्यवस्था बनाएगी।

नड्डा ने कहा 2025 तक फर्टिलिटी दर घटा कर 2.1 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है। नई नीति में कुष्ठ रोग को 2018 और काला जार को 2017 तक खत्म करने का फैसला किया गया है। नड्डा ने कहा कि नई स्वास्थ्य नीति 15 साल के बाद आ रही है। इसके सामने इस बीच के सामाजिक-आर्थिक, तकनीकी और महामारी परिदृश्य में बदलाव की वजह से आई चुनौतियों का सामना करने की जिम्मेदारी होगी।

मजबूत कदम 
– सरकारी अस्पतालों में जांच और दवा की मुफ्त व्यवस्था
– प्रति 1000 की आबादी पर अस्पतालों में दो बिस्तर
– औसत उम्र 67.5 से बढ़ा कर 70 साल तक करने का लक्ष्य
– स्वास्थ्य सुविधाओं पर जीडीपी का 2.5 फीसदी खर्च होगा
– उपचार के बजाय स्वस्थ रखने और वेलनेस कार्यक्रम पर जोर
– जनजाति समुदाय के परंपरागत दवाओं पर शोध और इस्तेमाल
– सभी के लिए इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड रखने की व्यवस्था

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