RSS की नागपुर में मीटिंग, अमित शाह और प्रवीण तोगड़िया शामिल होंगे

नागपुर. विलुप्त होती भाषा, बोली को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गहन चिंतन कर रहा है। संघ का मानना है कि क्षेत्रीय व आंचलिक स्तर पर बोली जानेवाली भाषा, बोलियां भारतीय परंपरा की वाहिका हैं। इन्हें सुरक्षित व समृद्ध रखने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।

डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर भवन, रेशमबाग में शुक्रवार से संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आरंभ हुई। सरसंघचालक मोहन भागवत व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की प्रमुख उपस्थिति में इस सभा में देश भर से करीब 1538 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। प्रतिनिधि सभा में भाषा, बोली को लेकर मंथन की विशेष पहल की गई है। सभा में विशेष प्रस्ताव के तहत भाषा बोली के संरक्षण का मामला चर्चा में लाया जा रहा है। क्षेत्रीय स्तर के गीत, भजन व कहानियों को प्रोत्साहित करने के लिए संघ के कार्यकर्ता समाज के बीच जाएंगे।

देश के 95 प्रतिशत जिलों से शामिल हो रहे प्रतिनिधि

– पत्रकार वार्ता में संघ कार्यों की जानकारी देते हुए सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि फिलहाल प्रतिनिधि सभा में एक मात्र विशेष प्रस्ताव लाया जा रहा है। वह प्रस्ताव भाषा, बोली की सुरक्षा से संबंधित है।

– गोपाल ने बताया कि संघ से युवाओं के जुड़ने की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले एक वर्ष में ही देखा जाए तो प्राथमिक व विशेष प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से 1 लाख 19 हजार 457 कार्यकर्ताओं को संघ का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रतिनिधि सभा में 1538 प्रतिनिधियों का शामिल होना अपेक्षित है। इनमें से 95 प्रतिशत प्रतिनिधि निश्चित ही उपस्थित रहेंगे। देश के 95 प्रतिशत जिलों से प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

– 25 महिला कार्यकर्ताओं का भी समावेश है। एक वर्ष के संघ विस्तार कार्य को देखा जाए, तो नगालैंड व कश्मीर घाटी के हिस्सों को छोड़कर देश के 95 प्रतिशत जिलों में संघ के प्रशिक्षण कार्य चल रहे हैं। फिलहाल 37 हजार स्थानों पर 58,969 शाखाएं चल रही हैं।

– दैनिक शाखा के अलावा साप्ताहिक मिलन व मासिक मिलन के तौर पर मंडली कार्यक्रम चल रहे हैं। शाखा, मिलन, मंडली के तौर पर 83,348 स्थानों पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

– विशेष प्रशिक्षण के तहत पिछले वर्ष 86 स्थानों पर शिक्षा वर्ग का आयोजन किया गया। 13 स्थानों पर हिंदू स्प्रीच्यूअल सर्विस फेयर का भी आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य भी उपस्थित थे।

सभा में पहुंचे प्रवीण तोगड़िया, साधा मौन
– विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा में पहुंचे। उनका आक्रामक तेवर तो कायम है, पर संघ भूमि में पहुंचते ही उन्होंने मौन साध लिया। संवाद माध्यम के प्रतिनिधियों से चर्चा में उन्होंने इतना ही कहा कि वे कुछ भी नहीं बोलेंगे, संघ का कार्यक्रम है। जो भी बोलना है संघ वाले बोलेंगे। प्रतिनिधि सभा के शुभारंभ के समय वे प्रतिनिधियों के बीच बैठे।

– हालांकि संघ सूत्र संकेत दे रहे हैं कि सभा में तोगड़िया व विश्व हिंदू परिषद की भूमिका खास रहेगी। संघ कार्य के दृढ़ीकरण के विषय को लेकर संघ से जुड़े सभी 35 संगठनों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। विहिप की ओर से हिंदुत्व के मुद्दे पर किए जानेवाले कार्यों में आ रही अड़चनों की रिपोर्ट रखी जाएगी।

तेवर तल्ख

– गौरतलब है कि भाजपा नेतृत्व व सरकार को लेकर तोगड़िया तल्ख तेवर अपनाए हुए हैं। एक वर्ष पहले नागपुर में ही विश्व हिंदू परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। 3 दिन बाद सम्मेलन के समापन के मौके पर तोगड़िया ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथ लिया था।

– उन्होंने कहा था कि विहिंप किसी सत्ता की परवाह नहीं करता है। अयोध्या में मंदिर निर्माण के मामले में किसी के आदेश या निर्णय का इंतजार नहीं किया जाएगा। मंदिर निर्माण किया जाएगा। बाद में तोगड़िया की भाजपा नेताओं की ओर से कथित उपेक्षा होने लगी। कुछ दिन पहले तोगड़िया अचानक गायब हुए थे। बाद में उन्होंने जान को खतरा बताते हुए केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी पर नाराजगी जतायी थी। आशंका की थी कि उनका एनकाउंटर करने की योजना है।

– राजस्थान के अलावा गुजरात पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। अंदरूनी तौर पर लगातार खबरें आ रही हैं कि भाजपाध्यक्ष अमित शाह के साथ तोगड़िया का मतभेद बढ़ता जा रहा है। लिहाजा संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में तोगड़िया के उपस्थित रहने की संभावना कम जतायी जा रही थी।माना जा रहा था कि तोगड़िया स्वास्थ्य कारणों से संघ की प्रतिनिधि सभा में अनुपस्थित रह सकते हैं।

– इस बीच यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि प्रतिनिधि सभा के शुभारंभ के मौके पर भाजपाध्यक्ष शाह के साथ तोगड़िया उपस्थित रह सकते हैं, लेकिन शुभारंभ के मौके पर तोगड़िया तो पहुंचे और अमित शाह भी देर रात पहुंच गए।

इंतजार के बाद रात में पहुंचे शाह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रेशमबाग में चल रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में शामिल होने के लिए भाजपाध्यक्ष अमित शाह का शुक्रवार को दिन भर इंतजार किया जाता रहा। सुबह 8.30 बजे सभा के शुभारंभ के मौके पर उनकी उपस्थिति अपेक्षित थी, लेकिन वे नहीं पहुंच पाए। रात करीब 9.10 बजे विमानतल पर उनका आगमन हुआ।

– उनके स्वागत के लिए राज्यसभा सदस्य अजय संचेती, महापौर नंदा जिचकार समेत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समर्थक भाजपा पदाधिकारी विमानतल पर करीब 5.30 बजे से डटे हुए थे। शाह विमानतल पर पहुंच कर सीधे रविभवन पहुुंचे। यहां रात में विश्राम के बाद शनिवार को सुबह 9 बजे प्रतिनिधि सभा में शामिल होंगे।

– शनिवार को ही संघ के संगठनात्मक चुनाव का अहम निर्णय लिया जाएगा और सरकार्यवाह चुना जाएगा। सरकार्यवाह संघ में संगठनात्मक मामलों में दूसरा बड़ा पद माना जाता है।

सभा परिसर से बाहर ठहरे
– संघ की प्रतिनिधि सभा में शामिल सभी प्रतिनिधि सभा परिसर में ही 11 मार्च को समापन तक ठहरेंगे, लेकिन अमित शाह व प्रवीण तोगड़िया सभा के प्रतिनिधि होते हुए बाहर ठहरे हैं।

– संघ सूत्र के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से दोनों नेताओं को सभा परिसर से बाहर ठहरने की छूट दी गई है। तोगड़िया मध्य नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के एक पदाधिकारी के आवास पर ठहरे हैं। शाह व तोगड़िया प्रतिनिधि सभा समाप्त होने तक यहां रहेंगे।

गोपनीयता

– प्रतिनिधि सभा में चर्चा को लेकर विशेष गोपनीयता बरती जा रही है। विशेषकर मीडिया से दूरी बना रखी है। सभा परिसर के प्रवेश द्वार के पास मीडिया कक्ष अवश्य बनाया गया है, लेकिन स्वयंसेवकों को निर्देश दिया गया है कि कोई भी मीडियाकर्मी प्रवेश द्वार तक न पहुंच पाए।

– शुक्रवार को सभा के शुभारंभ के मौके पर केवल फोटोग्राफर व कैमरामैन को सभा कक्ष तक जाने का मौका दिया गया। बाद में किसी को भी सभा परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी को छोड़कर अन्य पदाधिकारी जमीन पर बैठे थे। शुक्रवार को दोपहर से सभा परिसर में प्रतिनिधियों के फोन बंद हो गए।

अाक्रामकता लेकिन मौन

संघ से जुड़े लगभग 35 संगठनों में से ज्यादातर संगठनों में सत्ता व सरकार को लेकर असंतोष देखा गया है। विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ व स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन तो खुलकर आक्रामक नजर आते रहे हैं। संकेत दिए जा रहे हैं कि प्रतिनिधि सभा में भी इन संगठनों का तेवर आक्रामक रहेगा, लेकिन सभा के आरंभ में प्रतिनिधियों के बीच मौन देखा गया।